भूख सिर्फ पेट की पीड़ा नहीं होती, यह आत्मसम्मान, उम्मीद और इंसानियत को भी चोट पहुँचाती है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना आज भी एक बड़ा संघर्ष है। ऐसे समय में जब समाज का एक वर्ग अभाव में जी रहा है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के दर्द को अपना मानकर आगे बढ़ते हैं।
नई दिल्ली के समाजसेवी श्री प्रमोद कुमार अग्रवाल उन्हीं में से एक नाम हैं, जो “कोई भी भूखा न सोए” के संकल्प के साथ निरंतर सेवा कार्य में सक्रिय हैं। वे Social Organization for Conquering Hunger के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं और वर्षों से जरूरतमंदों तक भोजन, गर्म कपड़े और आवश्यक सामग्री पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
सड़कों से समाज तक — सेवा की एक सशक्त पहल
प्रमोद अग्रवाल और उनकी टीम “अपनी सोच” संस्था के माध्यम से सड़कों पर रहने वाले लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, असहाय परिवारों और जरूरतमंद बच्चों तक पका हुआ भोजन पहुँचाते हैं। ठंडी रातों में गर्म कपड़ों का वितरण हो या किसी विशेष अवसर पर भोजन सेवा — उनकी टीम पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ कार्य करती है।
उनका मानना है कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। वे स्वयं आगे बढ़कर न केवल सेवा करते हैं बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करते हैं कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। उनका व्यवहार और स्वभाव अत्यंत सकारात्मक है, जो जरूरतमंद लोगों के मन में भरोसा और सम्मान जगाता है।
सेवा में संतोष, समाज में बदलाव
प्रमोद अग्रवाल कहते हैं कि भाईचारे और मानवता की भावना से किया गया कार्य आत्मिक संतुष्टि देता है। उनका आह्वान है कि यदि समाज का हर सक्षम व्यक्ति थोड़ी-सी जिम्मेदारी ले ले, तो कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा।
उनकी संस्था नियमित रूप से जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें सहायता उपलब्ध कराती है। यह पहल केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सहभागिता की भावना को भी मजबूत करती है।
प्रेरणा का स्रोत
आज जब सामाजिक असमानता एक बड़ी चुनौती है, ऐसे में प्रमोद अग्रवाल जैसे लोग आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। उनका कार्य केवल राहत नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच का विस्तार भी है।
हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि उनका यह अभियान और अधिक व्यापक स्तर पर समाज को जोड़ने का माध्यम बनेगा।
विशेष रिपोर्ट
पत्रकार: ऊषा महाना, नई दिल्ली
(एनजीओ दर्पण के लिए विशेष लेख)
📞 8010884848
🌐 www.ngodarpangov.org.in
📧 ngodarpanbharat@gmail.com